बोइंग ने दुनियाभर में उड़ान भर रही 737 मैक्स विमानों को फ़िलहाल सेवा से वापस ले लिया है.
कंपनी ने यह कदम दुर्घटनास्थल पर की गई जांच के बाद लिया है. जांचकर्ताओं को गड़बड़ी के कई सबूत मिले हैं.
रविवार को इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा से कीनिया की राजधानी नैरोबी के लिए उड़ान भर रहा बोइंग 737 मैक्स विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें सभी 157 लोगों की जान चली गई थी.
इसके बाद कई देशों ने इस विमान की उड़ान पर प्रतिबंध लगा दिए थे. बुधवार को भारत ने भी अपने हवाई क्षेत्र में इसके प्रवेश पर रोक लगा दी थी.
अमरीकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने कहा है यह सभी 371 विमानों की सेवाएं निलंबित करेगी.
फेडरल एविएशन एडमिनिट्रेशन (एफएए) ने कहा है कि नए सबूतों के अलावा सैटेलाइट से प्राप्त नए डेटा के आधार पर यह फ़ैसला लिया गया है.
एफएए की टीम वहां के नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड के साथ दुर्घटनास्थल पर जांच कर रही थी.
एफएए के अधिकारी डैन एलवेल ने बुधवार को कहा, "इथियोपियन एयरलाइंस का विमान कमोबेश लायन एयर के विमान की तरह दुर्घटना का शिकार हुआ था और इसे जांच कर रहे सभी पक्षों ने माना है."
पिछले साल अक्टूबर में लायन एयरलाइंस का बोइंग मैक्स विमान भी जकार्ता से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद हादसे का शिकार हो गया था और 189 लोगों की जान चली गई थी.
लायन एयरलाइंस ने इस विमान को हादसे से तीन महीने पहले ही अपने बेड़े में शामिल किया था.
बोइंग 737 मैक्स-8 का कॉमर्शियल इस्तेमाल 2017 में ही शुरू हुआ था और सुरक्षा को लेकर कंपनी ने बड़े-बड़े दावे भी किए थे.
सच्चाई: इस प्रोजेक्ट की डेडलाइन आगे खिसक गई है क्योंकि किन शहरों को स्मार्ट बनाया जाएगा, इसका फ़ैसला एक ही वक़्त पर नहीं हुआ. इतना ही नहीं, अब तक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए आवंटित फ़ंड का एक छोटा सा
हिस्सा ही इस्तेमाल हो पाया है.
भारतीय लोकसभा चुनाव 11 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं और इसलिए बीबीसी रियलिटी चेक टीम प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के किए दावों और वादों की पड़ताल कर रही है.
सरकार ने शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए निवेश का ऐलान साल 2014 में लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान किया था. इसके बाद 'स्मार्ट सिटी योजना' अगले साल यानी 2015 में लॉन्च हुई.
विपक्षी पार्टियों ने सरकार की 'स्मार्ट सिटी योजना' को प्रचार का एक ज़रिया भर बताया है और कहा है कि इसके नतीज़े ज़मीन पर नहीं दिखाई दे रहे हैं.
भारत सरकार ने ये साफ़ किया है कि स्मार्ट सिटी की कोई तय परिभाषा नहीं है. लेकिन इसने 100 चुने गए शहरों में रहने वाले लोगों की ज़िंदगी बेहतर बनाने के लिए फ़ंड देने का वादा किया. सरकार ने शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए
आधुनिक तकनीक और तौर-तरीकों के इस्तेमाल की बात कही थी.
सरकार का दावा था कि इन 100 शहरों में न सिर्फ़ बिजली और ऊर्जा की कमी पूरी करने वाली इमारतें होंगी बल्कि सीवेज के पानी कूड़े और ट्रैफ़िक जैसी तमाम बुनियादी समस्याओं से निबटने के लिए नई टेक्नॉलजी का इस्तेमाल भी
होगा.
मोदी सरकार ने स्मार्ट सिटीज़ मिशन के लिए देश भर से 100 शहरों को चुना और शहरों की आख़िरी सूची 2018 में चुनी गई.
हालांकि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत ही इतनी देर से हुई कि इसकी पहली डेडलाइन पीछे छूट गई और अब इसे पूरा करने का वक़्त बढ़ाकर 2023 कर दिया गया है.
इस योजना के तहत हर स्मार्ट सिटी को केंद्र की ओर से कुछ सालाना बजट दिए जाने की बात कही गई थी. इसके अलावा राज्यों और स्थानीय निकायों की ओर से भी कुछ राशि दिलाने की योजना थी.
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