बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की तस्वीर पूरी तरह साफ़ हो गई है. बिहार की कुल चालीस सीटों में से 17-17 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड चुनाव लड़ने जा रही है जबकि छह लोकसभा सीटों पर राम विलास पासवान की पार्टी चुनाव मैदान में होगी.
इसकी घोषणा भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने जनता दल (यूनाइटेड) के नीतीश कुमार और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के राम विलास पासवान की मौजूदगी में की. इतना ही नहीं अमित शाह ने अपनी घोषणा में ये भी कहा है कि आने वाले दिनों में राज्यसभा चुनाव के दौरान राम विलास पासवान राज्य सभा में भेजे जाएंगे.
दरअसल यही वह पहलू था जिसपर राम विलास पासवान की पार्टी अड़ी हुई थी. इस पहलू पर बीजेपी की ओर से दिख रही देरी के चलते ही राम विलास पासवान के बेटे और पार्टी के संसदीय दल के नेता चिराग पासवान ने राजनीतिक सरगर्मी का दौर बढ़ा दिया था.
चिराग ने 18 दिसंबर को ट्वीट कर बताया कि अगर 31 दिसंबर तक बीजेपी सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग के मसले को नहीं सुलझाती है तो नुक़सान संभव है. इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत हासिल करने वाले राहुल गांधी की तारीफ़ करते हुए कहा कि उन्होंने सही मुद्दे चुने थे, इसलिए जीते. इतना ही नहीं चिराग पासवान ने दो साल पहले हुए नोटबंदी से अब तक क्या हासिल हुआ है, इसके फायदे भी प्रधानमंत्री से पत्र के माध्यम से पूछ लिया था.
इन बातों से ये आशंका उत्पन्न होने लगी थी कि कहीं ऐन मौके पर राम विलास पासवान अपना पाला ना बदल लें. पासवान की पहचान भारतीय राजनीति में मौसम वैज्ञानिक की रही है, उनका अब तक का ट्रैक रिकॉर्ड ये बताता है कि वे अमूमन उस साइड पहुंच ही जाते हैं, जिसकी स्थिति मज़बूत होने लगती है.
दूसरी तरफ बिहार में अपने सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा के जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी दूसरी चूक नहीं करना चाहती थी, लिहाजा चिराग पासवान के जगाने के बाद भारतीय जनता पार्टी भी हरकत में दिखी. राम विलास पासवान और चिराग पासवान की मुलाकातें भारतीय जनता पार्टी के महासचिव भूपेंद्र यादव और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से हुई. अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद जब राम विलास पासवान और चिराग पासवान मीडिया के सामने पहुंचे थे तब तक कुछ तय नहीं हो पाया था. इसके बाद अरुण जेटली से भी मुलाकातें हुई.
यही वजह है कि रविवार की दोपहर जब अमित शाह, नीतीश कुमार और राम विलास पासवान एकजुट होकर प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे तब राम विलास पासवान ने कहा, "कुछ ऐसा था नहीं, कोई मामला था नहीं. तीन चार दिन तक मामला चला लेकिन कुछ था नहीं."
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि आख़िर वो बात थी क्या जिसके चलते तीन चार दिनों तक उहापोह की स्थिति बनी हुई थी?
दरअसल बीते अक्टूबर महीने में अमित शाह ने बिहार के सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग पर एक बैठक की थी, जिसमें इस बात पर सहमति बनी थी कि बीजेपी और जेडीयू एकसमान सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. उस बैठक तक उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक समता पार्टी भी गठबंधन का हिस्सा थी.
लिहाजा मोटे तौर पर इस बात का विकल्प उभरा था कि बीजेपी और जेडीयू 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, राम विलास पासवान की पार्टी चार सीटों पर और बाक़ी की दो सीटों पर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी. इस बैठक में अमित शाह ने राम विलास पासवान के लिए ये भी कहा था कि आपको राज्य सभा में भेजेंगे. ये चार सीटों के साथ एक राज्य सभा सीट का ऑफ़र था.
हालांकि बाद में जब उपेंद्र कुशवाहा सीट बढ़ाने की मांग के साथ गठबंधन से अलग हुए तो बीजेपी के लिए ये बेहद आसान हो गया था कि राम विलास पासवान को छह सीटें दे दी जाएं. लेकिन पासवान अमित शाह की ओर से राज्य सभा की सीट की बात को अपने सम्मान से जोड़ चुके थे.
Sunday, December 23, 2018
Wednesday, December 12, 2018
鲍彤谈改革:“改革就是改掉毛泽东的制度”
北京正在办“改革开放四十年展”。据说,展板上没有失误和问题,只有成绩;习近平新时代的成绩占四分之三,邓小平等前领导的成绩占四分之一。
有人问,这合不合乎实际?
我对领导人功绩大小之类的话题没有兴趣。我只知道中国的“改革”曾经关系到生和死。“改革”的生死存亡就是中国人的生死存亡;“改革”的主人,与其说是中共领导人,不如说是十多亿不愿做奴隶的中国人。
毛泽东活着时,全中国只有他一个人是有主导权的活人。他说公有,私有就是罪;他要统购统销,市场就被消灭了;他叫办公共食堂,家家户户的锅碗瓢盆就必须充公;他要你下乡,就不准你呆在城里;他认为什么话是修正主义,说这种话的人就必须挨斗,有些人因此被打死。当时盛行的口号“谁反对毛主席就打倒谁”,不只是吓唬吓唬人,它是必须照办的行动纲领。中国人要活,不摆脱毛泽东的制度是没有希望的。
1976年以来,凡是有效的改革都是改掉毛泽东制度的改革。无论是撤销“人民公社”,还是允许私人经济,毛活着,没有人敢试——敢试的人,不管大人物还是老百姓,一个个都被镇压了。是毛泽东之死,使改革出现了一线生机。
中国“改革”的冲天第一炮,是“人民公社”的瓦解。这瓦解,不靠党的领导;相反,靠的是不愿意服从党领导的农民。开始时只有一个村,村民们背着中共,冒着生命危险,自作主张决定,秘密分田到户(当时叫做“包产到户”);后来全国农民纷起,风起云涌,势不可挡,终于把毛泽东的党用来禁锢中国农民的那个把苏联集体农庄与东汉“五斗米道”拼凑而成的“人民公社”制度,送进了历史垃圾堆。
“改革”的第二件大事,恐怕要数城镇个体户和其他私有经济雨后春笋般的再生。为什么说“再生”?因为在毛泽东死之前,共产党已经在中国把私有经济连根拔光,连补鞋剃头之类的小摊头,也被国家洗劫一空,“收归国营”了。
毛一死,机会来了,被驱赶下乡的青年自作主张,不听毛的话,纷纷回城。回城之后何以为生?除了有门路的当了干部,有“顶替名额”的当了职工以外,绝大多数都被党“爱莫能助”。作为党国的弃婴,他们只能在“社会主义”体系之外自谋生路。所谓自谋生路,说白了,就是群起而走那条被毛和中共批倒批臭挖断堵死了的私有制的“邪路”,当个“万恶的私营者”。
有人问,这合不合乎实际?
我对领导人功绩大小之类的话题没有兴趣。我只知道中国的“改革”曾经关系到生和死。“改革”的生死存亡就是中国人的生死存亡;“改革”的主人,与其说是中共领导人,不如说是十多亿不愿做奴隶的中国人。
毛泽东活着时,全中国只有他一个人是有主导权的活人。他说公有,私有就是罪;他要统购统销,市场就被消灭了;他叫办公共食堂,家家户户的锅碗瓢盆就必须充公;他要你下乡,就不准你呆在城里;他认为什么话是修正主义,说这种话的人就必须挨斗,有些人因此被打死。当时盛行的口号“谁反对毛主席就打倒谁”,不只是吓唬吓唬人,它是必须照办的行动纲领。中国人要活,不摆脱毛泽东的制度是没有希望的。
1976年以来,凡是有效的改革都是改掉毛泽东制度的改革。无论是撤销“人民公社”,还是允许私人经济,毛活着,没有人敢试——敢试的人,不管大人物还是老百姓,一个个都被镇压了。是毛泽东之死,使改革出现了一线生机。
中国“改革”的冲天第一炮,是“人民公社”的瓦解。这瓦解,不靠党的领导;相反,靠的是不愿意服从党领导的农民。开始时只有一个村,村民们背着中共,冒着生命危险,自作主张决定,秘密分田到户(当时叫做“包产到户”);后来全国农民纷起,风起云涌,势不可挡,终于把毛泽东的党用来禁锢中国农民的那个把苏联集体农庄与东汉“五斗米道”拼凑而成的“人民公社”制度,送进了历史垃圾堆。
“改革”的第二件大事,恐怕要数城镇个体户和其他私有经济雨后春笋般的再生。为什么说“再生”?因为在毛泽东死之前,共产党已经在中国把私有经济连根拔光,连补鞋剃头之类的小摊头,也被国家洗劫一空,“收归国营”了。
毛一死,机会来了,被驱赶下乡的青年自作主张,不听毛的话,纷纷回城。回城之后何以为生?除了有门路的当了干部,有“顶替名额”的当了职工以外,绝大多数都被党“爱莫能助”。作为党国的弃婴,他们只能在“社会主义”体系之外自谋生路。所谓自谋生路,说白了,就是群起而走那条被毛和中共批倒批臭挖断堵死了的私有制的“邪路”,当个“万恶的私营者”。
Sunday, December 9, 2018
दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई धर्मसभा की आंखों देखी
दुदुंभी बजाती महिला, हाथों में ध्वज पताका लिए युवक, कुछ भगवा टी-शर्ट और कैप्स धारण किए हुए और राम के गीत गा रहे नौजवान, सब हिस्सा थे उस रैली का जो रविवार को विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित की थी.
अयोध्या धर्मसभा में जमा हुई कम भीड़ से सचेत संघ परिवार से जुड़े संगठन ने किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ी थी - नतीजा: तुर्कमान गेट से राजघाट को जानेवाली सड़क पर घंटे-आधे घंटे तक बस रैली में शामिल होने के लिए आनेवालों की क़तार ही नज़र आई.
अगर भीड़ बड़ी थी, तो धर्मसभा का आयोजन भी भव्य था - विशाल स्टेज जिसपर कम से कम दो दर्जन हिंदू साधु-संत बैठे थे, मैदान के चारों कोनों पर पुलिस के मचान और जगह-जगह लगे विशालकाय टीवी स्क्रीन, जिसपर बारी-बारी से मंच पर भाषण दे रहे वक्ता और भीड़ को देखा जा सकता था.
रैली में शामिल होनेवालों के लिए कुर्सी की व्यवस्था भी की गई थी.
अलग-अलग साधु-संतों के भाषणों के बाद बारी आई आरएसएस में नंबर दो के सबसे बड़े अधिकारी सह- कार्यवाह भैयाजी जोशी के बोलने की.
भैयाजी जोशी ने "मंदिर वहीं बनाएंगे की घोषणा करनेवाले जो लोग आज सत्ता में बैठे हैं" को याद दिलाया कि लोकतंत्र में संसद का भी अधिकार है.
संघ का भी समर्थन
सत्ता में बैठे उन लोगों को संसद के दायित्व की याद दिलाते हुए सुरेश जोशी ने कहा कि वो साधु-संतों के ज़रिए इस मामले पर लाये गए प्रस्तावों से पूरी तरह सहमत हैं.
जय श्री राम और मंदिर वहीं बनाएंगे के नारों के बीच एक के बाद एक साधु संत ने कहा कि हिंदू समाज का धैर्य समाप्त हो गया है और अब सरकार को चाहिए कि वो अयोध्या में एक भव्य मंदिर के निर्माण के लिए संसद में क़ानून लाए.
उनकी मांग थी कि ये क़ानून संसद के इसी यानी शीत सत्र में ही आना चाहिए और अगर विधेयक संसद में पास न भी हो पाता है तो सरकार को उसकी फर्क़ नहीं होनी चाहिए क्योंकि उससे ये साफ़ हो जाएगा कि कौन-कौन से राजनीतिक दल मंदिर के समर्थन में हैं और कौन विरोध में.
अयोध्या धर्मसभा में जमा हुई कम भीड़ से सचेत संघ परिवार से जुड़े संगठन ने किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ी थी - नतीजा: तुर्कमान गेट से राजघाट को जानेवाली सड़क पर घंटे-आधे घंटे तक बस रैली में शामिल होने के लिए आनेवालों की क़तार ही नज़र आई.
अगर भीड़ बड़ी थी, तो धर्मसभा का आयोजन भी भव्य था - विशाल स्टेज जिसपर कम से कम दो दर्जन हिंदू साधु-संत बैठे थे, मैदान के चारों कोनों पर पुलिस के मचान और जगह-जगह लगे विशालकाय टीवी स्क्रीन, जिसपर बारी-बारी से मंच पर भाषण दे रहे वक्ता और भीड़ को देखा जा सकता था.
रैली में शामिल होनेवालों के लिए कुर्सी की व्यवस्था भी की गई थी.
अलग-अलग साधु-संतों के भाषणों के बाद बारी आई आरएसएस में नंबर दो के सबसे बड़े अधिकारी सह- कार्यवाह भैयाजी जोशी के बोलने की.
भैयाजी जोशी ने "मंदिर वहीं बनाएंगे की घोषणा करनेवाले जो लोग आज सत्ता में बैठे हैं" को याद दिलाया कि लोकतंत्र में संसद का भी अधिकार है.
संघ का भी समर्थन
सत्ता में बैठे उन लोगों को संसद के दायित्व की याद दिलाते हुए सुरेश जोशी ने कहा कि वो साधु-संतों के ज़रिए इस मामले पर लाये गए प्रस्तावों से पूरी तरह सहमत हैं.
जय श्री राम और मंदिर वहीं बनाएंगे के नारों के बीच एक के बाद एक साधु संत ने कहा कि हिंदू समाज का धैर्य समाप्त हो गया है और अब सरकार को चाहिए कि वो अयोध्या में एक भव्य मंदिर के निर्माण के लिए संसद में क़ानून लाए.
उनकी मांग थी कि ये क़ानून संसद के इसी यानी शीत सत्र में ही आना चाहिए और अगर विधेयक संसद में पास न भी हो पाता है तो सरकार को उसकी फर्क़ नहीं होनी चाहिए क्योंकि उससे ये साफ़ हो जाएगा कि कौन-कौन से राजनीतिक दल मंदिर के समर्थन में हैं और कौन विरोध में.
Thursday, November 1, 2018
वेस्टइंडीज के 8 विकेट गिरे, कीमो पॉल आउट
टीम इंडिया और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज का पांचवां और आखिरी मुकाबला तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है. टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज की टीम ने 28.3 ओवर में 8 विकेट गंवा कर 94 रन बना लिए हैं. कीमो पॉल (4 रन) और देवेंद्र बिशू (4 रन) क्रीज पर हैं.
वेस्टइंडीज के विकेट्स
वेस्टइंडीज को पहला झटका भुवनेश्वर कुमार ने दिया, जब उन्होंने कीरोन पॉवेल को धोनी के हाथों कैच आउट करवाया. इसके बाद जसप्रीत बुमराह ने शाई होप को बोल्ड करते हुए मेहमान टीम को दूसरा झटका दे दिया.
मार्लोन सैमुअल्स को रवींद्र जडेजा ने कोहली के हाथों कैच आउट कराकर पवेलियन भेज दिया. इसके बाद शिमरोन हेटमेयर भी एलबीडब्ल्यू के रूप में रवींद्र जडेजा का दूसरा शिकार बन गए.
खलील अहमद ने ओपनिंग बल्लेबाज रोवमैन पॉवेल (16) को अपनी शॉर्ट बॉल से मिडविकेट पर खड़े शिखर धवन के हाथों कैच करा दिया.
फेबियन एलीन (4) को बुमराह ने अपना दूसरा शिकार बनाया. इसके बाद मुंबई में विंडीज टीम की ओर से फिफ्टी जड़ने वाले होल्डर (25) यहां भी टीम को संकट से उबारने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन खलील की गेंद पर वह केदार जाधव को आसान सा कैच देकर आउट हो गए.
वेस्टइंडीज ने चुनी पहले बैटिंग
वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया है और टीम इंडिया को गेंदबाजी दी है. भारतीय टीम में कोई बदलाव नहीं हुआ है. इसके अलावा वेस्टइंडीज की टीम में दो बदलाव हुए हैं, एश्ले नर्स की जगह देवेंद्र बिशू और चंद्रपॉल हेमराज की जगह ओशाने थॉमस को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली है.
पिछली बार जनवरी 1988 में तिरुवनंतपुरम के यूनिवर्सिटी स्टेडियम में वनडे मुकाबला खेला गया था, जिसमें इंडीज की टीम ने 9 विकेट से बाजी मारी थी. उस समय वेस्टइंडीज की टीम काफी मजबूत मानी जाती थी. भारत ने पिछली बार घरेलू वनडे सीरीज 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गंवाई थी और तब से स्वदेश में उसका अजेय अभियान जारी है. भारत अभी पांच मैचों की सीरीज में 2-1 से आगे है, जिसका एक मैच टाई भी रहा.
प्लेइंग इलेवन:
भारत: विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा, शिखर धवन, अंबति रायडू, महेंद्र सिंह धोनी, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, खलील अहमद, केदार जाधव.
वेस्टइंडीज: जेसन होल्डर (कप्तान), फेबियन एलेन, देवेंद्र बिशू, शिमरोन हेटमेयर, शाई होप, कीमो पॉल, रोवमैन पॉवेल, ओशाने थॉमस, केमार रोच, कीरोन पॉवेल और मार्लोन सैमुअल्स.
वेस्टइंडीज के विकेट्स
वेस्टइंडीज को पहला झटका भुवनेश्वर कुमार ने दिया, जब उन्होंने कीरोन पॉवेल को धोनी के हाथों कैच आउट करवाया. इसके बाद जसप्रीत बुमराह ने शाई होप को बोल्ड करते हुए मेहमान टीम को दूसरा झटका दे दिया.
मार्लोन सैमुअल्स को रवींद्र जडेजा ने कोहली के हाथों कैच आउट कराकर पवेलियन भेज दिया. इसके बाद शिमरोन हेटमेयर भी एलबीडब्ल्यू के रूप में रवींद्र जडेजा का दूसरा शिकार बन गए.
खलील अहमद ने ओपनिंग बल्लेबाज रोवमैन पॉवेल (16) को अपनी शॉर्ट बॉल से मिडविकेट पर खड़े शिखर धवन के हाथों कैच करा दिया.
फेबियन एलीन (4) को बुमराह ने अपना दूसरा शिकार बनाया. इसके बाद मुंबई में विंडीज टीम की ओर से फिफ्टी जड़ने वाले होल्डर (25) यहां भी टीम को संकट से उबारने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन खलील की गेंद पर वह केदार जाधव को आसान सा कैच देकर आउट हो गए.
वेस्टइंडीज ने चुनी पहले बैटिंग
वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया है और टीम इंडिया को गेंदबाजी दी है. भारतीय टीम में कोई बदलाव नहीं हुआ है. इसके अलावा वेस्टइंडीज की टीम में दो बदलाव हुए हैं, एश्ले नर्स की जगह देवेंद्र बिशू और चंद्रपॉल हेमराज की जगह ओशाने थॉमस को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली है.
पिछली बार जनवरी 1988 में तिरुवनंतपुरम के यूनिवर्सिटी स्टेडियम में वनडे मुकाबला खेला गया था, जिसमें इंडीज की टीम ने 9 विकेट से बाजी मारी थी. उस समय वेस्टइंडीज की टीम काफी मजबूत मानी जाती थी. भारत ने पिछली बार घरेलू वनडे सीरीज 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गंवाई थी और तब से स्वदेश में उसका अजेय अभियान जारी है. भारत अभी पांच मैचों की सीरीज में 2-1 से आगे है, जिसका एक मैच टाई भी रहा.
प्लेइंग इलेवन:
भारत: विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा, शिखर धवन, अंबति रायडू, महेंद्र सिंह धोनी, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, खलील अहमद, केदार जाधव.
वेस्टइंडीज: जेसन होल्डर (कप्तान), फेबियन एलेन, देवेंद्र बिशू, शिमरोन हेटमेयर, शाई होप, कीमो पॉल, रोवमैन पॉवेल, ओशाने थॉमस, केमार रोच, कीरोन पॉवेल और मार्लोन सैमुअल्स.
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